Friday, January 17, 2020

अभिभावक




"परिवार व्यक्ति के जीवन का प्रथम पडाव है। परिवार में जन्म लेने के बाद भावनात्मक संबंधों का प्रारंभ होता है, मानवीय संबधों का महत्व समझ में आता है, पारस्परिक संबंधों की ऊर्जा प्राप्त होती है और परिवार की जीवन शैली को आत्मसात करते हुए बच्चे का विकास होता है। विकास की यह यात्रा मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण और स्थायी भूमिका निभाती है। अपने परिवार के जीवन मूल्यों को बच्चा आत्मसात करता है। अपनी शेशवावस्था में बच्चा अपने पारिवारिक वातावरण से अपनी प्रारंभिक अनोपचारिक शिक्षा ग्रहण करता है। इस दौरान कई नेतिक मूल्यों से परिचय होता है, जैसे सच बोलना, बडों का आदर करना, ईश्वर मै विश्वास रखना, देश के प्रति श्रद्धा रखना, पारिवारिक संसाधनों का मिल बांट कर उपयोग करना, दूसरों की सहायता करना।
परिवार द्वारा दिए गए संस्कार पूरी जिन्दगी हमारे साथ रहते हैं और परिवार के संस्कारों की छाप हमारे व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देती है।"
"कहा गया है कि परिवार, व्यक्ति की प्रथम पाठशाला है और बच्चें की मां ही उसकी प्रथम गुरू होती हैं।



अक्षरAkash......#

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